पीएम कुसुम योजना 2024 (PM KUSUM Scheme)

पीएम कुसुम योजना (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) 08 मार्च 2019 को शुरू की गई थी। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के नेतृत्व में इस योजना का उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर किसानों की निर्भरता को कम करने के साथ-साथ भारतीय किसानों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही यह योजना 2030 तक गैर-जीवाश्म-ईंधन स्रोतों से 40% तक बिजली की स्थापित क्षमता का हिस्सा बढ़ाने की दिशा में सुरक्षा, बेहतर तंत्र और अच्छी आय के मामले में देश का पहला कदम है।

प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान योजना किसानों को रियायती दरों पर सौर सिंचाई पंप और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना में मदद करती है। योजना के अंतर्गत प्रत्येक किसान को ट्यूबवेल और पंप सेट स्थापित करने के लिए 60% अनुदान प्राप्त होगा। इसके साथ ही सरकार द्वारा कुल लागत का 30% लोन भी दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री कुसुम योजना अपडेट संशोधन (PradhanMantri Kusum Yojana Update Amendment)

यह प्रधान मंत्री ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभयान कार्यक्रम के लिए प्रशासनिक स्वीकृति के मुद्दे से संबंधित है। इस मामले में हिस्सेदारी रखने वालों से प्राप्त इनपुट को प्रतिबिंबित करने के लिए योजना के दिशानिर्देशों को अपडेट किया गया है। इसे 31 मार्च2026 तक बढ़ा दिया गया है, जिसमें 3 प्रमुख घटक बिना किसी बदलाव के पहले की तरह जारी रहेंगेऔर घटक बी और अन्य घटकों के बीच राशि का हस्तांतरण किया गया है।

  • विस्तार के संयोजन के साथयोजना के दिशानिर्देशों के साथ-साथ योजना के घटक तत्वों और घटकों के कार्यान्वयन में संशोधन किए गए हैं।
  • विस्तार को समायोजित करने के लिए यह संशोधन किए गए थे। उत्तर पूर्वी राज्यों जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के साथ-साथ उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश राज्यों में प्रत्येक किसान को 15 हॉर्सपावर तक की केंद्रीय वित्तीय सहायता उपलब्ध होगी | हालांकि 15 हार्सपावर तक के पंपों के लिए सीएफए कुल प्रतिष्ठानों के 10 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। यह जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश राज्यों पर लागू होता है।
  • घटक सी के अंतर्गत आने वाले फीडर लेवल के सोलराइजेशन के लिए सोलर सेल के इस्तेमाल करने की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है।
  • किसी और बजटीय संसाधनों तक पहुँचने से पहले, सीसीईए द्वारा अधिकृत दस हज़ार करोड़ रुपये के बजट आवंटन का उपयोग किया जाएगा।
  • यह आदेश 10वें परिसर के प्रभारी अधिकारियों की अनुमति से जारी किया गया है।

पीएम कुसुम योजना के उद्देश्य (PM Kusum Scheme Objectives)

पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत सोलर अर्थात सौर उर्जा द्वारा संचालित पंप लगाने के लिए किसान, किसानों के समूह (Farmers’ groups), पंचायत और सहकारी समितियां (Panchayats and Cooperatives) अप्लाई कर सकती हैं। इस स्कीम में शामिल कुल लागत को 3 श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिसमें सरकार किसानों की सहायता करेगी। सरकार किसानों को 60% की सब्सिडी प्रदान करेगी और लागत का 30% सरकार द्वारा लोन के रूप में दिया जाएगा। किसानों को परियोजना (Project) की कुल लागत का 10 फीसदी ही देना होगा।

इस योजना का उद्देश्य किसानों या ग्रामीण भूस्वामियों को 25 वर्षों तक स्थिर और निरंतर आय प्रदान करना है। इसे बंजर या असिंचित भूमि के अच्छे उपयोग के लिए रखा जाएगा। खेती की भूमि के मामले मेंसौर पैनल इतनी ऊंचाई पर स्थापित किए जाते हैं, जिससे खेती करने में किसानों को किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।यह योजना अक्षय ऊर्जा के उत्पादन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों और खेती योग्य क्षेत्रों में बंजर भूमि का उपयोग करती है। सरकार की वित्तीय सहायता से, राज्य और केंद्र दोनों, किसानों के वित्तीय बोझ को न्यूनतम रखा जाता है। कुसुम योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बना सकती है और किसानों की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार कर सकती है।

पीएम किसान सम्मान निधि योजना

पीएम कुसुम योजना के घटक (PM Kusum Scheme Components)

पीएम कुसुम योजना की योजना 2026 तक 25,750 मेगावाट की सौर और अन्य नवीकरणीय क्षमता जोड़ने की है। स्कोर प्राप्त करने के लिएकेंद्र सरकार ने संबंधित एजेंसियों को सेवा शुल्क सहित 34,422 करोड़रुपये की वित्तीय सहायता का प्रस्ताव दिया है। कुसुम योजना के मुख्य 3 घटक इस प्रकार हैं –

  • घटक ए (Component A)- इस स्कीम के अंतर्गत 2 मेगावाट आकार तक के व्यक्तिगत अक्षय ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना करके 10000 मेगावाट अक्षय ऊर्जा जोड़ने की योजना है। इन बिजली संयंत्रों को विकेंद्रीकृत, ग्राउंड-माउंटेड और ग्रिड से जोड़ा जाना है। यह बंजर भूमि पर स्थापित किए जाने हैं और सब-स्टेशन के 5 किमी के दायरे में आने चाहिए।
  • घटक बी (Component B) – 7.5 एचपी तक की व्यक्तिगत क्षमता वाले 17.50 लाख स्टैंडअलोन ग्रिड सौर ऊर्जा संचालित कृषि पंप स्थापित करने के लिए। यह पहले से ही उपयोग में आने वाले मौजूदा डीजल पंपों को बदलने के लिए है। एक किसान अधिक क्षमता का पंप लगा सकता है, लेकिन वित्तीय सहायता केवल 7.5 एचपी के कृषि पंप तक ही प्रदान की जाएगी।
  • घटक सी (Component C) – 7.5 एचपी (HP) तक की व्यक्तिगत पंप क्षमता वाले 10 लाख ऑन-ग्रिड या ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों को सोलराइज करना। इन संयंत्रों से उत्पादित अतिरिक्त बिजली संबंधित डिस्कॉम को पूर्व-निर्धारित टैरिफ आधार पर बेची जाएगी।

पीएम कुसुम योजना के लाभ (PM Kusum Scheme Benefits)

खेती करना कोई आसान काम नहीं है, इसमें सिर्फ खून-पसीना ही नहीं बल्कि बहुत सारा पैसा भी लगता है। हालाँकिकिसान भाइयों का वित्तीय बोझ को कम करने के लिए सरकार द्वारा इस इस योजना को लांच किया गया है। इस योजना के शीर्ष लाभ इस प्रकार हैं-

  • भारत सरकार 28 हजार 250 मेगावाट की अधिकतम एकत्रीकरण शक्ति सीमा के साथ सौर संयंत्रों की स्थापना शुरू करेगी।
  • इस स्कीम के अंतर्गत सरकार द्वारा 60 प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान की जाएगी और कुल लागत का 30 प्रतिशत का लोन दिया जायेगा, जिसका अर्थ है कि किसानों को कुल लागत का सिर्फ 10% ही वहन करना होगा।
  • योजना विवरण के अनुसार, हमारी सरकार अत्याधुनिक सौर पंप स्थापित करने के लिए सब्सिडी प्रदान करेगी, इन पंपों की क्षमता 720 एमवी (MV) है।
  • इस स्कीम के तहत कृषकों को अतिरिक्त उत्पादित बिजली डायरेक्ट हमारी सरकार को बेचने का अवसर मिलता है, जिसके परिणामस्वरूप उनकी इनकम में वृद्धि होती है।
  • किसान अपनी बंजर और उपजाऊ भूमि दोनों को नियोजित कर सकते हैंक्योंकि सौर संयंत्र ऊंचाई पर स्थापित होते हैं।
  • पीएम कुसुम स्कीम अक्षय ऊर्जा अर्थात रिन्यूएबल एनर्जी के उपयोग से पर्यावरण (Environment) के अनुकूल कृषि को बढ़ावा देगी।
  • इस योजना में प्रत्यक्ष रोजगार सृजन क्षमता भी है। उपलब्ध अध्ययनों के अनुसार, लगभग 24.50 कार्य-वर्ष प्रति मेगावाट छोटी क्षमता के सौर अधिष्ठापन का सृजन किया जाता है। इसलिए, स्व-रोजगार बढ़ाने के अलावा, इस योजना से कुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए 7.55 लाख नौकरी-वर्षों के बराबर रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
  • इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन के कारण किसानों को मिलने वाले अन्य लाभों में जल संरक्षण, जल सुरक्षा और ऊर्जा दक्षता शामिल हैं।

पीएम कुसुम योजना की कमियां (PM Kusum Scheme Draw backs)

  • वाटर लेबलिंग में कमी (Decrease in Water Table)-बिजली सब्सिडी के कारण, बिजली की आवर्ती लागत इतनी कम है, कि किसान पानी पंप करते रहते हैं और जल स्तर निरंतर नीचे (Water Table) गिरता जा रहा है। सोलर इंस्टालेशन में वॉटर टेबल गिरने की स्थिति में उच्च क्षमता वाले पंपों को अपग्रेड करना बहुत मुश्किल है क्योंकि एक नए सोलर पैनल को जोड़ने की आवश्यकता होती है, जो बहुत महंगा है।
  • छोटे और सीमांत किसानों की चूक (Small&MarginalFarmersDefaults)– चूंकि यह योजना 3 एचपी और उच्च क्षमता के पंपों पर केंद्रित है, इसलिए छोटे और सीमांत किसानों की सापेक्ष चूक हुई है, जिसके कारण सौर पंप अधिकांश किसानों तक नहीं पहुंच रहे हैं, क्योंकि उनमें से लगभग 85% छोटे और सीमांत किसान हैं। इसके अलावाकम जल स्तर की वास्तविकता, विशेष रूप से उत्तर भारत और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों मेंकिसान के लिए छोटे आकार के पंपों को सीमित कर देती है।
  • लॉजिस्टिक्स इश्यू (Logistics issue) :- मामला उपकरणों की घरेलू उपलब्धता का ही है। जबकि पंप घरेलू आपूर्तिकर्ताओं के लिए एक चुनौती नहीं हैं, सौर पंपों की उपलब्धता अभी भी एक मुद्दा है। इसके अलावासख्त डीसीआर (घरेलू सामग्री आवश्यकताएँ) के कारण, सौर उपकरणों के आपूर्तिकर्ताओं को घरेलू सेल सोर्सिंग बढ़ानी पड़ती है। हालाँकि पर्याप्त घरेलू सेल निर्माण क्षमता नहीं है।

किसान ड्रोन योजना क्या है

केंद्रीय और राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता (Central and State Government ProvidedFinancial Assistance)

घटक ए (Component A):-

किसानों या डेवलपर्स से बिजली खरीदने के लिएप्रोक्योरमेंट बेस्ड इंसेंटिव (PBI) @ 40 पैसे / kWh या 6.60 लाख/मेगावाट/वर्ष, जो भी कम हो, एमएनआरई (MNRE) द्वारा भारत की वितरण कंपनियों को पहले 5 वर्षों (Five Years) के लिए प्रदान किया जाएगा।

घटक बी और सी (Component B & C):-

  • बेंचमार्क लागत या निविदा लागत, जो भी कम होगी उसी के अंतर्गत 30% की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी |
  • राज्य सरकार द्वारा 30% की सब्सिडी प्रदान की जाएगी |
  • शेष 40% किसान द्वारा |

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh), उत्तर पूर्वी राज्यों (North Eastern States), उत्तराखंड (Uttarakhand), सिक्किम (Sikkim), अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (Andaman & Nicobar Islands), जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) सहितराज्यों में निवास करने वाले कृषकों हेतु 50 प्रतिशत की केंद्रीय वित्त सहायता, जबकि 30 प्रतिशत स्टेट गवर्नमेंट की सब्सिडी, बाकी 20% किसान द्वारा वहन किया जायेगा।

पीएम कुसुम योजना के लिए पात्रता मानदंड (PM Kusum Scheme Eligibility Criteria)

पीएम कुसुम योजना के लिए पात्रता मानदंड इस प्रकार हैं-

  • एक व्यक्तिगत किसान (Individual farmer)
  • किसान समूह (Group of farmers)
  • किसान उत्पादक संगठन या एफपीओ (FarmerProducer Organization or FPO)
  • पंचायत (Panchayat)
  • सहकारिता (Cooperative)
  • जल उपयोगकर्ता संघ (Water Users Association)

पीएम कुसुम योजना हेतु आवश्यक दस्तावेज (PM Kusum Scheme Documents Required)

  • किसान का आधार कार्ड (Farmer’s Aadhar Card)
  • राशन कार्ड (Ration Card)
  • रजिस्ट्रेशन की कॉपी (Registration Copy)
  • ऑथराइजेशन लेटर (Authorization Letter)
  • जमीन की जमाबंदी की कॉपी (Copy of Land Deed)
  • मोबाइल नंबर (Mobile Number)
  • बैंक खाता विवरण (Bank Account Details)
  • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ (Passport Size Photo)

कृषि इनपुट अनुदान योजना

 
 
  
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